धन्नावंशी समाज के प्रबुद्धजनों के साथ श्री लक्ष्मीनारायण (से.नि. पुलिस उप अधीक्षक) धनावंशी स्वामी ने समाज के गठन के लिए वर्ष 1973-74 से प्रयास किए। श्री धनावंशी स्वामी समाज राजस्थान जोधपुर नाम की संस्था का गठन वर्ष 1975 में महन्त श्री बद्रीदास गोलिया की अध्यक्षता में हुआ। संस्था का पंजीयन क्रमांक 169 सन् 1976-77 उपपंजीयक सहकारिता विभाग, जोधपुर में हुआ, जिसका कार्यक्षेत्र पूरा राजस्थान है। पंजीयन के समय संयोजक श्री लक्ष्मीनारायण (से.नि. पुलिस अधीक्षक) अध्यक्ष महन्त श्री बद्रीदास गोलिया, उपाध्यक्ष श्री रतनदास निम्बीजोधा, मंत्री महन्त श्री प्रेमदास जायल, सचिव श्री गटमदास गजसिंहपुरा, कोषाध्यक्ष श्री देवाराम स्वामी बाकलिया, संयुक्त सचिव श्री ईश्वरदास दुजार तथा कार्यकर्ता श्री मानदास जिनरासर बताये गये थे। लम्बे समय तक महन्त बद्रीदासजी गोलिया द्वारा मन्दिर गोवर्धननाथ सिटी पुलिस जोधपुर में बैठकों का आयोजन करते रहे। समय अनुसार गहन चिन्तन पश्चात् समाज के अन्तर्गत छात्रावास भवन निर्माण हेतु अलग संस्था के गठन का निश्चय हुआ।श्री लक्ष्मीनारायण (से.नि. पुलिस उप- अधीक्षक) संयोजक द्वारा डॉ. के. डी. स्वामी (पूर्व कुलपति, विश्वविद्यालय, भरतपुर) की अध्यक्षता में कार्यकारिणी का गठन हुआ, जिसमें श्री चतुर्भुज वैष्णव (पूर्व अध्यापक), श्री प्रेमदास वैष्णव (पूर्व अध्यापक), श्री परमानन्द सहारण, जेठूदासजी वैष्णव, सोहनदासजी वैष्णव, श्री रामदास (यूको बैंक), श्री जयनारायण स्वामी (उपनिदेशक कृषि), श्री भागूलाल वैष्णव इत्यादि सक्रिय सदस्य थे।पंजीकरण क्रमांक 39/जोधुपर/1995-96 है। वर्तमान में रामेश्वर नगर में दो पट्टासुदा भूखण्डों पर छात्रावास का निर्माण हुआ है। डॉ. के.डी. स्वामी एवं श्री लक्ष्मीनारायणजी के नृतत्व में सभी समाज बंधुओं का योगदान रहा। लेकिन कुछ समाज के प्रबुद्धजनों का स्मरण यहां पर समीचीन है। स्व. तुलसीदाजी पूनिया पाल, स्व. मोहनदासजी गाजू, स्व. लालदासजी फागणिया झींपासनी सभी का योगदान अविस्मरणीय रहेगा। छात्रावास निर्माण में भी मैं शुरु से अन्त तक जुड़ा रहा एवं हर सम्भव सहयोग दिया। चूंकि शिक्षा का कार्य था। राजकीय अवकाश लेकर चन्दा एवं छात्रावास/शिक्षा बाबत अधिकांश क्षेत्रों में समाज के प्रबुद्धजनों का दर्शन लाभ हुआ तथा जीवन यात्रा में अतुलनीय अनुभव प्राप्त हुआ।एक बार डॉ. के. डी. स्वामी के साथ झुमियावाली अबोहर पंजाब गए। तब सभी समाज बंधुओं को धनावंशी शब्द की महता बताई, क्योंकि वहां विभिन्न बैरागी वैष्णव का चलन है। लेकिन धनावंशी शब्द से धनाजी महाराज की प्रेरणा मिलती है तथा सभी नवीन ऊर्जा से ओतप्रोत हुए। वहां के सरपंच श्री ओमप्रकाशजी सिहाग के नेतृत्व में गांव वालों से लाखों रुपये चन्दा दिया, जिससे छात्रावास निर्माण को गति मिल सकी। वापसी के समय बरसात एवं भयंकर गर्मी थी।समाज की उन्नति हेतु दूसरा आवश्यक कदम श्री धनाजी महाराज की जयन्ती उत्सव मनाना था, जो कि छात्रावास भवन में निरन्तर मनाया जा रहा है। एक बार डॉ. के. डी. स्वामी एवं मेरे द्वारा जोधपुर मुख्यालय के प्रत्येक घर निमन्त्रण देकर आए तथा प्रत्येक से टोकन राशि सहयोग लिया। छात्रावास में भोज का आयोजन किया तथा सभी समाज बंधुओं द्वारा महिलाओं सहित भाग लिया गया, जो कि आज दिवास्वप्न सा बन गया है धनाजी महाराज की जयन्ती जोधपुर में नियमित रूप में मनाई जाती रही है। इन वर्षों में छात्रावास भवन में मनाई जाती है। पूर्व में महन्त श्री बद्रीदास गोलिया के निवास स्थान / मन्दिर श्री गोवर्धननाथजी सिटी पुलिस में मनायी जाती थी। महन्तजी द्वारा बालक धनाजी की फोटो हमेश के लिए छात्रावास में रखवा दी है। इस वर्ष भी जयन्ती दिनांक 5 फरवरी 2021 को धमधाम से मनाई जायेगी, क्योंकि अब तो डॉ. चेतन स्वामीजी द्वारा स्तुति एवं धनाजी की आरती भी उपलब्ध करवा दी है। वर्तमान में हमें डॉ. चेतन स्वामी श्रीडूंगरगढ़ को सामाजिक नेतृत्व के लिए सम्बलता देनी चाहिए तथा यथार्थ में श्री धनाजी महाराज के प्रति अधिकाधिक श्रद्धा रखनी चाहिए। प्रत्येक समाजजनों को अधिक से अधिक सकारात्मकता एवं सहयोग रखते हुए धनावंशी समाज की उनति की गतिशीलता अधिकाधिक रखी जानी चाहिए।पुनश्च जोधपुर समाज संगठन की वजह से ही मंगलपुरा (लाडनूं) समाज भवन को असामाजिक तत्वों से न्यायिक प्रकरण में समाज के पक्ष में फैसला हुआ। नागौर छात्रावास भूमि आवण्टन के समय भी समाज का लैटरहेड काम आया। महन्त श्री बद्रीदासजी की वजह से समाज की अन्य पिछड़ा वर्ग में साद, स्वामी, बैरागी वर्ग में शामिल हुए।इस कड़ी में धनावंशी स्वामी युवा विकास संस्था, जोधपुर के नाम का भी पंजीकरण वर्ष 2005 06 में करवाया गया, जिसका रजि. नं. 39 व वर्ष 2005-06 है अर्थात् समाज में जागृति का संचरण हो । रहा है।•जोधपुर धनावंशी समाज द्वारा नियमिति बैठकें की जाती थी। एक फार्म का सृजन किया, जिस पर घर के सभी सदस्यों का विवरण लिया जाता था। वर्ष 2010 में श्री चतुर्भुज वैष्णव तथा श्री कौशल कुमार सहारण द्वारा पूर्ण संकलित दूरभाष निर्देशिका का प्रकाशन किया गया, जिसमें सभी उपलब्ध दूरभाष शामिल किए गए तथा समाज की अन्य जानकारियां दी गई। हालांकि समय के साथ इसका पुन: संशोधित प्रकाशन आवश्यकता महसूस की जा रही है, जिसकी कार्यवाही श्री कौशलकुमार सहारण तथा श्री चतुर्भुज वैष्णव से से.नि. अध्यापक द्वारा की जा रही है।ऐसे ही सन् 1996 में मेरे पिताश्री रूपदास स्वामी (ढाका) सुजानगढ़ जोधपुर आए तब समाज बंधुओं द्वारा योगदान बाबत कहा तो उन्होंने कमरा निर्माण की सहमति दी, क्योंकि छात्रावास कार्यकारिणी सदस्य अधिकतम सहयोग की अपेक्षा रखते हैं। भविष्य की योजना-वर्तमान में समाज अध्यक्ष द्वारा नवीन योजना क्रियान्वित नहीं हो पा रही है। छात्रावास अध्यक्ष श्री लक्ष्मीनारायणजी का स्वर्गवास 6 दिनांक 6 जुलाई 2020 में हो गया। आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि समाज हित के कार्य अवश्य होते रहेंगे।