खिंयाला (जायल, नागौर)
नागौर जिले के जायल तहसील में स्थित एक ऐतिहासिक गाँव
गाँव परिचय
खिंयाला गाँव राजस्थान के नागौर जिले की जायल तहसील में स्थित एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध गाँव है। यह तहसील मुख्यालय से लगभग 9 किलोमीटर उत्तर में बसा हुआ है। अपनी प्राचीन परंपराओं, अनूठी लोक-कथाओं और गहरी धार्मिक आस्था के लिए यह क्षेत्र विशेष पहचान रखता है।
संपर्क सूत्र
CONTACT DETAILSप्रेमदास स्वामी (धनावंशी बिडियासर, खिंयाला)
9784398383नौकरीपेशा (Occupation)
🌾 आजीविका एवं व्यवसायखिंयाला गाँव का मुख्य व्यवसाय कृषि (खेती-बाड़ी) है। यहाँ की अधिकांश कृषि भूमि 'डोली भूमि' (मंदिर/धार्मिक कार्यों के लिए समर्पित भूमि) के अंतर्गत आती है। समय के बदलाव के साथ, ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए खेती के साथ-साथ छोटे-मोटे व्यवसाय और साइड बिजनेस भी कर रहे हैं।
सरकारी नौकरी
जनसंख्या
71 लोग
42 लोग
10 लोग
इतिहास
गाँव की स्थापना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमिस्थापना:
विक्रम संवत 1321 में श्री कमलसी जी बिडियासर जाट (दादोजी महाराज) ने खिंयाला गाँव की नींव रखी थी। आज भी दादोजी महाराज को पूरे आदर के साथ ग्राम देवता के रूप में पूजा जाता है।ऐतिहासिक मायरा (भात): संवत 1456 में इस गाँव के श्री धर्माराम जी चौधरी ने हरमाड़ा (जयपुर) की गंगा गुजरी को अपनी धर्म-बहन बनाया था। उन्होंने उस दौर का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक 'मायरा' भरा था। इस त्याग और प्रेम की याद में आज भी हमारे समूचे क्षेत्र में मायरा भरने के समय 'धर्मो जी के मायरे का गीत' बड़े चाव से गाया जाता है।
🙏 धन्ना वंशी स्वामी समाज और आस्था के केंद्रगाँव के सभी धन्ना वंशी स्वामी अपने पंथ प्रवर्तक, भक्त शिरोमणि गुरुदेव धन्ना जी महाराज के प्रति गहरी आस्था और अटूट भक्ति रखते हैं।परिवारों की स्थिति: खिंयाला में वर्तमान में धन्ना वंशी समाज के 23 घर हैं, जिनमें शामिल हैं:बिडियासर: 13 घरछाबा: 9 घरभाम्भू: 1 घरगाँव के प्रमुख मंदिर और पुजारी परंपरा:गाँव में ठाकुर जी (भगवान श्रीकृष्ण) के कुल चार भव्य मंदिर हैं, जहाँ प्राचीनकाल से सेवा-पूजा की परंपरा चली आ रही है:धन्ना वंशी ठाकुर जी मंदिर (प्रथम): यहाँ बिडियासर परिवार के सदस्य पुजारी हैं।धन्ना वंशी ठाकुर जी मंदिर (द्वितीय): यहाँ छाबा परिवार के सदस्य पुजारी हैं।अन्य ठाकुर जी मंदिर: एक मंदिर में रांकावत स्वामी जी और दूसरे में दायमा ब्राह्मण जी पूजा-अर्चना का दायित्व संभालते हैं।
📜 परिवारों का आगमन और वंशावलीबिडियासर परिवार: बिडियासर धन्ना वंशी मूल रूप से खिंयाला के ही मूल निवासी हैं। बड़े-बुजुर्गों के अनुसार, इसी गाँव के बिडियासर जाट कालांतर में धन्ना वंशी 'साद' (संत/पुजारी) बने थे। (राव जी की बही में यहाँ के पूर्वजों का पूर्ण विवरण प्रामाणिक न होने के कारण, वर्तमान में प्रथम पूर्वज की प्रामाणिक खोज का प्रयास निरंतर जारी है)।छाबा परिवार: लगभग 300 वर्ष पूर्व यह परिवार छापर से आकर खिंयाला में स्थापित हुआ था।भाम्भू परिवार: लगभग 100 वर्ष पूर्व श्री प्रभु दास जी भाम्भू दिनारपुरा से आकर यहाँ बिडियासर परिवार में 'घर-जँवाई' के रूप में बसे थे।
